बृहस्पतिवार के व्रत की विधि

Brihaspativar Vrat Vidhi

हमारी हिन्दू संस्कृति को सभी धर्मं में सब से बड़ा माना जाता है| हिन्दू धर्म में व्रत और उपवास का बहुत जादा महत्त्व माना जाता है| हर व्रत का अपना अपना महत्त्व है| हिन्दू धर्म में हर दिन अलग अलग भगवान की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है| इन में सभी व्रत की अलग अलग विधि और अलग अलग प्रभाव है| जैसे सोमवार को भगवान शिव की पूजा की जाती है| ऐसे ही सप्ताह के सातों दिन अलग अलग भगवान की पूजा और व्रत किया जाता है| आज हम आप को बताने जा रहे है कि बृहस्पतिवार (गुरुवार) के दिन कोन से भगवान की पूजा और व्रत रखना चाहिये| और इस व्रत के क्या विधि है और क्या महत्त्व है| (Brihaspativar Vrat Vidhi)

Download in PDF

बृहस्पतिवार के व्रत की कथा

आरती भगवान श्री बृहस्पति देवता की


हिन्दू धर्म में बृहस्पतिवार का व्रत बड़ा ही फलदायी माना जाता है। गुरुवार के दिन भगवान श्री हरि विष्णुजी की पूजा की जाती है। पर कई लोग भगवान बृहस्पतिदेव जी और केले के पेड़ की भी पूजा करते हैं। भगवान बृहस्पतिदेव जी को बुद्धि का कारक माना जाता है। हिन्दू शस्त्रों में तो केले के पेड़ को पवित्र माना गिया है| कहा जाता है कि अगर बृहस्पतिवार का व्रत पुरे विधि-विधान से करा जाए तो गुरु ग्रह के दोष से मुक्ति मिल जाती है|


Brihaspativar Vrat Vidhi
Brihaspativar Vrat Vidhi

बृहस्पतिवार के व्रत की विधि (Brihaspativar Vrat Vidhi)

हिन्दू धर्म में लिखा गिया है कि हमे व्रत पुरे विधि-विधान से ही करने चाहिए| क्योकि कहा जाता है विधिवत पूजन के बाद ही व्रत सम्पूर्ण माना जाता है| इस लिए हर व्रत को विधिवत तरीके से करना चाहिए|
हिन्दू पुराण के अनुसार गुरुवार का व्रत अनुराधा नक्षत्र युक्त गुरुवार से आरंभ करके कम से कम लगातार सात गुरुवार करना चाहिए। आप गरुवार के व्रत 7, 11, 21, 40, 48, 51 और 108 या फिर पूरी जिंदगी के लिए क्र सकते है|
व्रत वाले दिन को प्रात: काल में स्नान आदि से निवृत्‍त होकर बृहस्पति देव का पूजन करना चाहिए| बृहस्पति देव की पूजा पीली वस्तुएं, पीले फूल, चने की दाल, मुनक्का, पीली मिठाई, पीले चावल और हल्दी चढ़ाकर की जाती है| पूजा करते समय मन्त्रों का उचर्ण जरुर करे| इस व्रत में केले के पेड़ की का पूजा की जाती है| जल में हल्दी डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाएं. केले की जड़ में चने की दाल और मुनक्का चढ़ाएं साथ ही दीपक जलाकर पेड़ की आरती उतारें| पूजन के बाद भगवान बृहस्पति की कथा जरुर सुननी चाहिए| और फिर भगवान की आरती करनी चाहिए| व्रत वाले दिन में एक समय ही भोजन करें| खाने में चने की दाल या पीली चीजें खाएं, नमक न खा‌एं, पीले वस्त्र पहनें, पीले फलों का इस्तेमाल करें|

बृहस्पतिवार के व्रत की कथा

बृहस्पति देव के मंत्र

ॐ ऐं श्रीं बृहस्पतये नम:॥
ॐ बृं बृहस्पतये नम:॥
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:॥
ॐ गुं गुरवे नम:॥
ॐ क्लीं बृहस्पतये नम:॥
ॐ ह्रीं क्लीं हूं बृहस्पतये नमः॥

आरती भगवान श्री बृहस्पति देवता की

गुरूवार के व्रत का फल

गुरूवार के व्रत पूरी विधि-विधान से करने से भगवान श्री हरि विष्णुजी प्रसन्न हो जाते है अपने भगतो की हर मनो कामना पूरी कर देते है|
गुरूवार को बृहस्पति देव की पूजा करने से धन, विद्या, पुत्र तथा मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है| परिवार में सुख तथा शांति रहती है| कई लोग तो गुरूवार का व्रत जल्दी विवाह करने के लिये भी करते है|

Leave a comment