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इस धरती को हमने भारत माता कहा है तो जीते जी अपनी माँ कोई जलाता है क्या?

यदि भारतीय संस्कृति ने आकाश तत्व को पिता , वायु तत्व को भाई, अग्नि तत्व को बहिन,जल को निकट का संबंधी ओर पृथ्वी तत्व को माँ का दर्जा दिया है तो क्या कोई अपनी माँ को जलाता है ?

मित्रों पंच महाभूतो में आधार तत्व भूमि व वायु तत्व को भारी नुकसान केवल भूमि तत्व व वायु तत्व का नुकसान नही अपितु हमारे शरीर के पृथ्वी तत्व व वायु तत्व में असुंतलन का भयानक कारण बनेगा ।
पृथ्वी तत्व हमारे जीवन में समृद्धि,स्थायित्व लाता है । प्रकृति का नैसर्गिक नियम है जो हम प्रकृति को देते है वही वापस हमारे पास लौटकर आता है 
आपकी समृद्धि,जीवन के स्थायित्व को नरवाई जलाकर कृपया खतरे में न डाले ।
भारतीय संस्कृति में ऐसा माना गया कि भूमि तत्त्व में विष खीचने की अदभुत क्षमता होती है। भूमि तत्व को ग्रहण करने के लिये अर्थात पृथ्वी भुत को शुद्ध करने के लिये हमारे पूर्वज ब्रहमुहूर्त में नगें पेर हरी घांस पर या मिट्टी पर चलते थे । कुछ अमृततुल्य गैसों का उत्सर्जन सर्योदय के पहले पृथ्वी से होता है उनका लाभ उठाना चाहिये । कोई भी नया निर्माण करने से पहले भूमि पुजन की परंपरा हो या मिट्टी लैप चिकित्सा से स्वास्थ्य लाभ आज भी हमारे यंहा विद्यमान
है ।

हमारे प्रदेश में नरवाई जलाना प्रतिबंधित कर दिया गया है।
प्रदेश के खेतों में फसल काटने के बाद नवाई जलाने पर अब जुर्माना लगेगा। राज्य सरकार ने इसके आदेश पूर्व से ही जारी किये हुये है । इसके तहत पर्यावरण को नुकसान पहुंचने के कारण फसल कटाई के बाद बची फसल यानी नरवाई को जलाना प्रतिबंधित कर दिया गया है। बावजूद इसके नरवाई जलाई जाती है तो 15 हजार रुपए तक का जुर्माना लग सकेगा।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पर्यावरण प्रदूषण एवं नियंत्रण अधिनियम 1981 के तहत धान व गेहूं की फसल कटाई के बाद बची फसल को जलाने पर प्रतिबंध लगाया है। इसके तहत राज्य के पर्यावरण विभाग ने सोमवार को इसकी अधिसूचना जारी करने के बाद मंगलवार को आदेश भी जारी कर दिए। सभी कलेक्टर्स को भी यह आदेश भेज दिया गया है। इसके तहत इसी महीने से जुर्माने की कार्रवाई सख्ती से करने के लिए कहा गया है।

जुर्माना कितना
नरवाई जलाने पर अब दो एकडृ से कम कृषि भूमि वाले किसान को २५०० रुपसए, दो एकड़ से ज्यादा व पांच एकड़ से कम कृषि भूमि वाले को पांच हजार और पांच एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि वाले को पंद्रह हजार रुपए तक का जुर्माना लगेगा। यह जुर्माना पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में वसूला जाएगा।

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