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सोमनाथ मंदिर की कहानी अयोध्या जेसी ,आखिर केसे पूर्ण हुआ मंदिर!जानिए

महमूद ग़ज़नवी ने सन १०२४ में कुछ ५,००० साथियों के साथ सोमनाथ मंदिर पर हमला किया, उसकी सम्पत्ति लूटी और उसे नष्ट कर दिया। ५०,००० लोग मंदिर के अंदर हाथ जोडकर पूजा अर्चना कर रहे थे, प्रायः सभी कत्ल कर दिये गये।


इसके बाद गुजरात के राजा भीम और मालवा के राजा भोज ने इसका पुनर्निर्माण कराया। सन 1297 में जब दिल्ली सल्तनत ने गुजरात पर क़ब्ज़ा किया तो इसे पाँचवीं बार गिराया गया। मुगल बादशाह औरंगजेब ने इसे पुनः 1706 में गिरा दिया।


देश की आजादी के बाद प्रथम उपप्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की अगुवाई में एक अध्यादेश लाकर सोमनाथ मंदिर का पुर्ननिर्माण किया गया । हालांकि सेकुलरपंथी के नाम पर पंडित – जवाहरलाल नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के पुर्ननिर्माण का विरोध किया किन्तु सरदार पटेल ने इसे देश का गौरव की बात कहते हुए इसका निर्माण आवश्यक बताया । 


इसके बाद भारत सरकार के पुरातत्व विभाग ने उत्खनन द्वारा प्राप्त ब्रह्मशिला पर शिव का ज्योतिर्लिग स्थापित किया । सौराष्ट्र के पूर्व राजा दिग्विजय सिंह ने ८ मई १९५० को मंदिर की आधारशिला रखी तथा ११ मई १९५१ को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ॰ राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर में ज्योतिर्लिग स्थापित किया ।।

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