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वही देश आगे क्यों है जो अपने देनिक जीवन में सारा काम अपनी मात्रभाषा में करते है ?

आज हम विश्व के इतने बड़े वातावरण में रहते हे जहा इतने देश रहते है जिनकी सबकी अपनी अपनी प्रथक भाषाए है इस पुरे विश्व में लगभग ६५०० भाषाए बोली जाती है

बात अब भारत की की जाये तो भारत में एसा कहा जाता है की भारत में प्र्त्येक २० किलोमीटर के बाद भाषा,पानी एवं जमीन बदल जाती है १०००० से ज्यादा लोग बोलने वाली एसी १२२ भाषाए भारत में बोली जाती है भारत की ९०% आबादी जो भाषाए बोलती है एसी भारत में २२ भाषाए है भारत के संविधान में इन २२ भाषाओ को मान्यता दी है

भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा

भारत में रहने वाले लगभग ४० % लोग हिंदी भाषा का प्रयोग करते है इनमे जो मुख्यतः राज्य हिंदी भाषा का प्रयोग करते है वो मध्यप्रदेश ,राजस्थान ,छत्तीसगढ़ ,बिहार, हिमाचल प्रदेश दिल्ली, उत्तरप्रदेश , और उत्तराखंड है

पर भारत का एक दुर्भाग्य यह हे की यहाँ की जनता अपनी मात्रभाषा बोलने में शर्म करते है तथा उनपर जिन लोगो ने राज किया था उनकी अंग्रेजी भाषा को बोलने में गर्व महसूस करते है

लेकिन अगर आज हम पुरे विश्व की तुलना उनकी मात्रभाषा से करते है तो आज विश्व में वही देश सबसे आगे हे जहा पर उन देशो में सारा कामकाज उनकी खुद की मात्र भाषा में किया जाता है

उदाहरण के तोर पर जेसे चीन , जापान, रूस ,अमेरिका ! इसे दुनिया में बहुत देश है जो पानी मात्र भाषा का ही प्रयोग करते है

अब हमे निर्णय करना हे की हम भारत को विश्व गुरु केसे बनायेंगे, अपनी मात्र भाषा से या गुलामी देने वाली भाषा से ,,आज से हम सबको ये प्रण करना चाहिए की हम सब हिंदी में ही बात करेंगे और हमारे बच्चों को हिंदी माध्यम के स्कूल में ही प्रवेश करवाएंगे, तभी हम अपने भारत को विश्व गुरु बना पाएंगे तथा अपने भारत को पुनःपरम वैभव पे ले जायेंगे..!!

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